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जींद-सोनीपत रेलवे ट्रेक पर दौडेगी, भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

Hydrogen Train

-110 किमी प्रति घंटा की स्पिड से दौडेगी हाइड्रोजन ट्रेन

हरियाणा उत्सव, भंवर सिंह

भारत ने हाल ही में दुनिया में सबसे ज्यादा क्षमता वाला हाइड्रोजन फ्यूल वाला ट्रेन इंजन बनाया है। अभीतक दूसरे देशों ने 500 से 600 हॉर्सपावर की क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेनें बनाई गई हैं। लेकिन भारत ने 1200 हॉर्सपावर की क्षमता वाला इंजन बनाया है। यह एक बड़ी सफलता है। यह दुनिया की सबसे लंबी ट्रेनें में शामिल है। इस ट्रेन का ट्रायल हरियाणा के जींद से सोनीपत रेलवे ट्रेक पर किया जाएगा। हरियाणा के सोनीपत और जींद जिले के वासी इसके साक्षी बनेंगे।

रेल मंत्रालय भारत में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हरियाणा के जींद-सोनीपत ट्रेक पर इसी सप्ताह में इस ट्रेन का ट्रायल रन शुरू होने की उम्मीद है। यह ट्रेन कब जींद-सोनीपत ट्रेक पर दौडेगी कभी भी इसकी तारीख आ सकती है। यह ट्रेन जींद, गोहाना व सोनीपत के अलावा कई रेलवे स्टेशनों पर ठहराव करेगी।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल द्वारा संचालित ये ट्रेनें डीजल ट्रेनों के विपरीत इमिशन के रूप में सिर्फ वाटर और हीट जनरेट करती हैं। 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली हाइड्रोजन ट्रेन है।
यह ट्रेन 8 कोच वाली हाई-स्पीड हाइड्रोजन ट्रेन 110 किमी/घंटा की गति से दौड़ेगी। एक बार में 2638 यात्रियों को सफर करवा सकती है। भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित ट्रेनों के निर्माण के लिए 2800 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। जिसके अंतर्गत 35 ट्रेनों को तैयार किया जा रहा है।

-गोहाना में कब पहुंचेगी हाइड्रोजन ट्रेन
यह ट्रेन गोहाना रेलवे स्टेशन पर कब पहुंचेगी? अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। क्योंकि इस ट्रेन का ट्रायल रेलवे के उच्च अधिकारियों की निगरानी में होगा। इसके लिए उच्च अधिकारयों की एक टीम बनाई गई है।
हरियाणा के जींद-सोनीपत ट्रेक पर शुरू होने वाला यह ट्रायल भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ट्रेक करीब 89 किलोमीटर का है। ट्रेन की तकनीकी क्षमता, सुरक्षा मानकों और परिचालन दक्षता का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल परीक्षण के बाद इसे नियमित संचालन में लाने की योजना है। यह ट्रेन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री द्वारा तैयार की गई है।

हाइड्रोजन ट्रेन क्या है और कैसे काम करती हैं?
हाइड्रोजन ट्रेन एक ऐसी रेलगाड़ी है जो हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर आधारित होती है। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों का एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है। हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन गैस को ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली पैदा करती है। इस प्रोसेस में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन एक फ्यूल सेल में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं। जिससे बिजली पैदा होती है। यह बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटर को चलाने के लिए उपयोग की जाती है। इस प्रोसेस का एकमात्र उप-उत्पाद पानी है। जिसके कारण यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन करती है।
हाइड्रोजन ट्रेनें मौजूदा रेल संशाधनों के साथ आसानी से काम कर सकती हैं। इन्हें डीजल ट्रेनों की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल माना जाता है। यह तकनीक पर्यावरण को स्वच्छ रखती है। यह ट्रेन बिना शोर के चलती है। क्योंकि हाइड्रोजन ट्रेनें डीजल इंजनों की तुलना में बहुत कम शोर पैदा करती हैं।

क्या है हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत?
उच्च क्षमता और रफ्तार
यह ट्रेन 1200 हॉर्सपावर की शक्ति के साथ 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। एक बार में यह 2638 यात्रियों को ले जा सकती है। जिस कारण बड़े पैमाने पर यात्री यात्रा का लाभ उठा सकते हैं।

लंबी दूरी तय करने में सक्षम
8 कोच वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक है। यह लंबी दूरी के रूट्स पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है, खासकर हेरिटेज और पहाड़ी मार्गों पर।
ऊर्जा दक्षता
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक डीजल इंजनों की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल है। यह ट्रेन कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकती है, जिससे परिचालन लागत में कमी आती है।

स्वच्छ और शांत संचालन
हाइड्रोजन ट्रेनें डीजल ट्रेनों की तुलना में बहुत कम शोर पैदा करती हैं, जिससे यात्रियों को एक शांत और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है।

 

 

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