September 21, 2026
Gohana

 नाभि में तेल या घी डालने के चमत्कार, बीमारियों में मिलेगा फायदा

-अद्भूत होती है हमारी नाभी

हरियाणा उत्सव/ बीएस बोहत

गोहाना डेस्क: जब हम छोटे थे, तब हमारे पेट में दर्द या कोई को बीमारी हमारे शरीर में दिखाई देती थी। तो हमारी दादी-नानी हमारी नाभि में तेल या देशी घी को लगाती थी। उससे हमारी सभी रक्त नलीयां चिकनी हो जाती थी और हमें हर पेट के दर्द में आराम हो जाता था।
एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी। जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे। लेकिन आपकी नाभि में तेल या घी डालने से सभ कुछ हो सकता है।

दोस्तों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है। गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है। गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है। नाभी के पीछे की ओर पेचूटी होता है। जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां (नसें) स्थित होती है
नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक बीमारियों में फायदा हो सकता है

1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय
सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।

2. घुटने के दर्द में उपाय
सोने से पहले तीन से सात बूंद अरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।

3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।

4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:
नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।

नाभी में तेल डालने का कारण:
हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है। जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।

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